न क्लिक करें, न शेयर करें, न छिपाएं”: कोटद्वार में पुलिस ने स्कूली बच्चों को CSAM और साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक

​”डरना नहीं, बताना है” — गुड टच-बैड टच, बाल सुरक्षा और साइबर खतरों पर बच्चों को दिया गया सुरक्षात्मक संदेश

संवाददाता – नितिन कुमार

​कोटद्वार/पौड़ी। पौड़ी जिले में बच्चों और युवाओं को बढ़ते अपराधों, नशे और साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए पुलिस द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पौड़ी, सर्वेश पंवार के निर्देशन में कोटद्वार के झंडी चौड़ स्थित श्री पृथ्वी विद्या मंदिर में एक विशेष जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया।

​यह कार्यक्रम एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और समाजसेवी श्रीमती इंदु नौटियाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सचेत किया गया।

​CSAM और पोक्सो एक्ट पर दी गई सख्त हिदायत

जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी, भिक्षावृत्ति, बाल शोषण और पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया गया। पुलिस टीम ने बच्चों को चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के प्रति जागरूक करते हुए चेतावनी दी कि बच्चों से संबंधित किसी भी प्रकार की अश्लील या शोषणकारी डिजिटल सामग्री बनाना, डाउनलोड करना, पास रखना या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करना एक बेहद गंभीर और दंडनीय अपराध है।

​टीम ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां उन्नत तकनीक के माध्यम से इन गतिविधियों पर पैनी नजर रखती हैं। बच्चों को सलाह दी गई कि वे ऐसी कोई भी सामग्री न तो डाउनलोड करें और न ही आगे प्रसारित करें। यदि इंटरनेट पर ऐसी कोई सामग्री दिखाई दे, तो उसे बिना शेयर किए तुरंत अपने अभिभावकों या पुलिस को सूचित करें।

​”डरना नहीं, बताना है”: गुड टच और बैड टच की पहचान

बच्चों को “गुड टच और बैड टच” का अंतर समझाते हुए टीम ने उन्हें “डरना नहीं, बताना है” का मूल मंत्र दिया। बच्चों को प्रेरित किया गया कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके साथ अनुचित व्यवहार करता है या उन्हें असहज महसूस कराता है, तो वे इसे छिपाने के बजाय बेझिझक अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं।

​साइबर ठगी और नशे से दूर रहने की अपील

वर्तमान डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों, ऑनलाइन ठगी और साइबर बुलिंग से सतर्क रहने की सलाह दी गई। इसके साथ ही, नशे के दुष्परिणामों और गलत संगति से दूर रहकर अपना ध्यान पढ़ाई और सकारात्मक गतिविधियों में लगाने के लिए प्रेरित किया गया।

​आपातकाल के लिए याद रखें ये महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर:

कार्यक्रम के अंत में संकट की स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त करने के लिए बच्चों को महत्वपूर्ण टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई, जो इस प्रकार हैं:

​पुलिस आपातकालीन सहायता नंबर: 112

​चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098

​साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930

​मानस (नशा मुक्ति/मानसिक स्वास्थ्य) हेल्पलाइन: 1933

 

 

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